सच में…!!! कुछ नहीं बदला है यहाँ…





शिक्षा में बदलाब की प्रक्रिया…पर हमनें
शोर किया इस दोमुंहे रास्ते का…?




ढंग और तरीका बदला है…!!! पर हमारा
योगदान…?




रहन-सहन में सुधार…!!! पर किसी के
आवरण को नोंच कर…?




स्वास्थ के क्षेत्र मे संम्भावनाएँ बढ़ी…!!!
किसकी किमत पर…?




हमने जीने कई तरीके बना लिये…!!!
पर जिन्हें इसका भान नहीं उनके लिये
हमनें क्या किया…?




समाज समृद्धि की ओर उन्मुख है…!!!
पर संघर्ष बढ़ रहा है, क्यों…?




खुशियाँ पंख फैला रही हैं…!!! पर पहले
हमने इसे खुद के लिए सहेजना शुरु किया
यही था न…! प्रथम विभेद…?




दोषी कौन…? हम या समाज…!!!
पर इस समाज का निर्माता कौन है…?




कभी जिंदगी को जज्बातों के सहारे देखा…
सच में करीब से…!!बहुत कुछ कहते हैं हम,
पर किसी का हाथ थाम कर कभी सड़क
पार करवाया है…?




"जब तक सिद्धांतों को Action में नहीं लाया
जाता…वह मात्र काला अक्षर ही होता है जिसमें
कोई ताकत-कोई ऊर्जा नहीं होती…!!!
अगर दो व्यक्तियों में से एक भी किसी
की सहायता करता है--प्रेरित करता है तो
क्या समाज ऐसा हीं दिखेगा जो नजर आता है।
हम अपनी समस्त जिम्मेदारियों को राजनेता और
भ्रष्टाचार के उपर नहीं डाल सकते…यह देश हमारा
भी है…हमारा भी कर्तव्य है…पहल करने की…! कोई
नेता जन्म से नहीं बनता वह भी हमारे बीच का
ही एक सदस्य है…प्रत्येक व्यक्ति अगर अपने
आस-पास ही सफाई शुरु कर दे…कौन सा ऐसा
लक्ष्य है जो अप्राप्य रह जाएगा…!!! "

'उपर के सारे तस्वीर मेरे प्रिय आत्मन ने मुझे भेजे थे,
इसकारण उनका बहुत आभारी हूँ…।'

9 comments:

Raag said...

ये इपत्र मुझे भी पहले मिला था। चिट्ठे पर लगा कर आपने अच्छा किया। बहुत ही उद्वेलित करने वाले चित्र हैं।

Shrish said...

सचमुच ये चित्र बहुत ही हृदयविदारक हैं और सोचने को विवश करते हैं कि आज भी दुनिया में कुछ नहीं बदला है।

Tarun said...

ये चित्र बहुत ही हृदयविदारक हैं, कुछ लोगों के कारण ये मासूम ये सब भुगत रहे हैं.

ranju said...

यह चित्र दिल को दहला देते हैं
आज हम सब उन्नति का दम भरते हैं पर यह देख के लगता है की सिर्फ़ बाते ही करते हैं हम ..कुछ इनके लिए हम सब मिल कर सके तो शायद कुछ बदल सके ...नही तो शायद कभी कुछ नही बदलेगा !!

मोहिन्दर कुमार said...

आपके प्रतेक शब्द से सच्चाई टपकती है शायद हम मानवता शब्द का अर्थ ही भूल गये हैं समाज ने काफी रास्ता पार किया है मगर शायद दिशाहीन हो कर

मोहिन्दर कुमार said...

आपके प्रतेक शब्द से सच्चाई टपकती है शायद हम मानवता शब्द का अर्थ ही भूल गये हैं समाज ने काफी रास्ता पार किया है मगर शायद दिशाहीन हो कर

manya said...

सिर्फ़ इतना कहूंगी कि मन बहुत उद्वेलित होता है ये सब देखकर.. पर क्या हम सिर्फ़ कोरी बातें करते रहेंगे.. उफ़!बेचारे.. न that's all?..
Thanx Divya to show the naked face of life.

Divine India said...

बहुत-2 शुक्रिया-मोहिन्दर जी,तरुन,राग जी,पंडित जी,रंजू व मान्या… जो इस नंगी सत्यता को पहचाना जो हृदयविदारक ही नहीं वरन एक संदेश भी है…हम लाख ऊँचे तख्तों पर बैठकर खुद को बढ़ा समझे किंतु जबतक ये गुदरी के लाल हमसे दूर हैं--हमारे सभ्यता का विकास अधूरा ही रहेगा…!!

Nirmal T V said...

This is really gr8 stuff...nice comparison...