Sunday, January 21, 2007

Incredible India...??? अतुल्य भारत…???

Incredible India...??? अतुल्य भारत…???

अचानक मैं घोड़े की टाप से रौंदा जाने लगा, चेहरे से रक्त की धार फूटने
लगी, मेरा हरा-भरा बाग जिसमें मैनें पौधे लगाए थे सब सूखते जा रहे थे दीमक ने उनके जड़ों को खोंखला कर दिया था,मैं इस दृष्य को देख तड़पने लगा कि किसी ने मेरा गला दबा दिया...मैं...मैं ! उठ बैठा,शायद कोई सपना था लेकिन बहुत अटपटा कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या......? सुबह के छः बजे थे और आदतन उठते ही दोनों
हाथों की हथेलियों को देखते हुए अपूर्ण तस्वीर, कार्य, थोड़े अपराध के लिये क्षमा मांगता
परमात्मा से और जोड़ से अंगड़ाई लेते हुए "Good Morning India" कहता उठा, सामनेके वातायन से आते उषा-किरण की तरफ गया...झांक कर देखा तो वही भागम-भाग जिंदगी,
वही पुरानी लकीर, ढाक के तीन पात...। मैं कुछ असमंजस में ही था कि देखा एक भीखाड़ी
किसी-से कुछ मांग रहा था थोड़ी देर बाद वह शक्स उगलियों से इशारे करता जाता दिखा
चुकिं मैं दुसरे महले पर था,कुछ सुन न सका पुनः देखा कि वही भीखाड़ी किसी दूसरे के
सामने उसी तरह खड़ा था मुझे दिख रहा था कि यह भीखाड़ी जो दिखने में तो ठीक ही
था, इसका आत्म-सम्मान गली मे भटक रहे कुत्ते के समान हो गया है दुत्कारो फिर भी
सस्ती रोटी की खातिर दरवाजे पर दुम हिलाएगा ही । अस्त हुआ मानव स्वाभिमान
पथ-प्रदर्शक देश की फटेहाल नियति को गा रहा है।
मुझे अत्यतं अकुलाहट हो रही थी कि पराधीनता की दहलीज को
पार किये ५० वर्षों से ज्यादा हो चुके हैं--और निश्चित ही अंग्रेजों को गये भी किंतु आश्चर्य
इस बात का है कि अंग्रेजों की विंदाश और सलीक़ेदार शैली को तो आज तक नहीं सीख
पाए हाँ...उनकी हड़पनीति में...भाई क्या बात है...! घुड़दौड़ लगा रखी है।शायद हम कहीं
अपनी पराधीनता को इस उल्लास से कि हम Modern हो रहे हैं, भुनाने का प्रयास तो नहीं
कर रहे हैं...? आज हम स्वतंत्र हैं...लेकिन स्वाधीन (स्व+अधीन) नहीं हो पाए हैं क्योंकि जिस
स्वतंत्रता की बात बारंबार की जा रही है वो तो मात्र व्यक्तिक स्वतंत्रता से ज्यादा कुछ भी
नहीं जबकि स्वाधीन होना यानि हम समाज-संस्कार-संस्कृति-परिवेश में उच्चोत्तर विकास
करते हुए 'स्व' के उपर 'अधीन' रहकर देश को पटल पर रख सकें। स्वाधीनता इस अर्थ में
कि हम स्वतंत्र जरुर हैं लेकिन मानसिक रुप से रुग्न और पराधीन--अनुसरण बुरा नहीं है
किंतु उसमें अगर देश का जज्वा ना हो तो रंग बदल जाता है। मात्र व्यक्तिक विकास ही
देश का विकास नहीं है--चाहे हम लाख चिल्ला-चिल्ला कर विकसित होने का धौंस...बुद्धिजीवी
होने का छोटे और कमजोर लोगों पर जमा सकें किंतु जैसे ही हम विकसित राष्ट्र की श्रेणी में
खड़े होते हैं, हमारी धीधी बंध जाती है। न तो साहित्य, न विज्ञान, न मेडिसिन, न खेल किसी
भी प्रतिस्पर्धा में हम कही नहीं ठहरते-- भारत की सांस्कृतिक उपलब्धियों में रमने पर
अंतःकरण गीता और शंकराचार्य के दर्शन, चरक की आयुर्वेद एवं आध्यात्मिक उन्नति की
सुगंध से आज भी महक उठता है। मैनें यहाँ के कई महात्माओं-माताओं के शिविर में जाकर
देखा है, अन्य विश्व से आए बृहत संख्या में ये वही लोग हैं जो अपना सबकुछ छोड़कर
शांति मांग रहे हैं-- यही सब देखकर उज्जवल-आनंद तथा असीम गौरव का बोध हम करते ही हैं।
भारत का "संन्यास" उस महान दार्शनिक 'प्लेटो' के लिये भी अज्ञात ही था,जब 'सिकंदर महान'
से अपनी गुरुदक्षिणा में भारत से एक "संन्यासी" लाने को कहा था। यह भी ठीक है की
ब्राह्मणवाद ने धर्म की आढ़ मे कई सामाजिक कुरितियों को जन्म दिया लेकिन हमारा
आध्यात्मिक दर्शन आज भी शांति की राह विश्व को दिखा ही रहा है--चाहे रजनीश हो या
रामदेव या दीपक चोपड़ा (इनके शिष्य तो राष्ट्रपति बुश ही हैं) या श्री श्री रविशंकर अनेकों
बाहरी लोग इनके आश्रम में देखे जा सकते हैं। लेकिन जिसके रहस्य को संसार देखने निकला है,
उसे हमने ही भुला दिया है-- अमेरिका ने अब्राहम लिंकन, मार्टिन लुथर किंग; अफ्रिका ने
मंडेला; जर्मनी ने विस्मार्क आदि को महान से महानतम बनाया है...और हम इस बात पर
लड़-कट रहे हैं कि महात्मा गांधी महान या अंबेदकर--पटेल या नेहरु, यह एक विचित्र स्थिति
है,आने वाले १०० वर्षों में निश्चय हीं हम उस अवस्था में पहुँच चुके होंगे जब हमें अपने
धर्म-मातृभूमि पर शर्म आने लगेगी। इस देश को आजाद हुए ५० वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं
और हम बारंबार इसी प्रश्न में उलझे हैं कि क्या वह सपना साकार हुआ जो हमारे राष्ट्रपिता
ने,हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देखा था...यानि वह सपना जिसमें स्वतंत्र भारत
उन तमाम अभिशापों से मुक्त होगा जो पराधीनता की देन थे और हम भीतरी और बाहरी
समृद्धि की आभा से खिल उठेगें गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, असमानता,भ्रष्टाचार,अराजकता आदि
प्रेतों से मुक्त होकर एक सुंदर और अखंड भारत का स्वरुप उभरेगा।
ऐसा नहीं है कि हमने उपलब्धियाँ प्राप्त नहीं की हैं--आर्थिक
व सामाजिक रुप से हम काफी समृद्ध हुए हैं;आम आदमी की बेहतरी के लिये अनेकों
योजनाओं एवं परियोजनाओं का निर्माण हुआ है;गांव उन्नति की ओर हैं;वैज्ञानिक व तकनीकि
स्तर पर भी काफी कुछ किया जा रहा है। हमारा राष्ट्र निश्चित ही विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा… की धुन में है पर इसमें अपने जैसा क्या है मैं समझ नहीं पाता
अगर बड़ी-बड़ी पार्टियों में,रोड पर नंगा नाच,खुलेआम शराब पीना अगर आधुनिकता है तो
दिखाओ इन तस्वीरों को उन राष्ट्रों को जो इनको बहुत पहले कर चुके हैं,हँसते हैं वो
हमपर...अनुकरण करते-करते नकलची बन गये हैं हम, शिल्पा के साथ क्या हुआ…
उन्होनें कहा मैं भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ और आप भी देखें हम कितने Modern
हो चुकें हैं, किंतु वे किस आधुनिकता की गुहार लगाने गईं हैं, वही... जहाँ लज्जा व स्थिरता है
ही नहीं यह सोचनीय पहलु है; जिस विवेकानंद ने 1893 शिकागो में भारत की सांस्कृतिक
संस्कारों को गौरवान्वित किया था,जहाँ विश्व के अनेकों महान चिंतकों ने उठकर, अंतत:
अभिनन्दन किया……।क्या लगता नहीं उस स्तर को हमने कितना उठाया है…, हमें
अपनी माँ के उपर गर्व होने की बजाए शर्म आती है आज...धिक्कार है ऐसे सपूतों पर...।
पंजाबी-मराठी, बंगाली-राजस्थानी, बिहारी आदि में कौन सम्पन्न...होड़ लगी है। मात्र
हमारा स्वरुप निर्मम दया की अभिव्यक्ति बोल रहा है,इतने सालों में देश की राजनीति
भ्रष्ट आचरण के मनुष्यों की बेढ़ियों में जकड़ चुका है---नीजी स्वार्थों की पूर्ति में देश और
समाज क्षेत्रवाद- जातिवाद- संप्रदायवाद में बुरी तरह झुलस रहा है,मूल्य गिरते जा रहे हैं,
हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मूल्य खंडित होकर राजनीतिक बजबजाहट में
डूब रही है। हमें यहाँ तक अपनी भाषा-संस्कृति-साहित्य-परंपरा और राष्ट्रीयता के प्रति
गौरव बोध रहा ही नहीं।
कहते हैं मीडिया हर देश की आँखे होती है पर यहाँ तो वह भी
पहले अपना अस्तित्व खोज रही है--कई जगहों पर मैंने देखा है,काफी बड़े-बड़े लोगों का
Interview लिया जाता है लेकिन यह वे लोग हैं जिसने आम आदमी से अपने को जोड़ा
ही नहीं है उनकी बातो को अगर सुनें, देश का सच Five Star Hotel और इनके जश्न में
छुपा होता है। The problem of indian elit class is only that कि वो जब तक आम होते
है विचारवान होते है जैसे ही उपर स्तर पर पहुँचते हैं अपना वह चोला उतार फेंकते हैं,
विदेशी लिबास,विदेशी भाषा, विदेशी संस्कार और भारतीयता एक शर्मनाक......।बाहर से
हम चाहें जितना समृद्धि का डोंग कर लें अपनी अस्मिता को निरंतर खोते ही जा रहे है।
राखी सावंत, दीपल शाह आदि अगर आज के युवावर्ग की Role Model हों तो समझा जा
सकता है की तस्वीर कैसी है--इस रुप मे INDIA को भी बदलकर AMRENDIA रख देना
चाहिए और कहना चाहिए कि न अच्छा लगे तो कान बंद कर लो...!याद रखें की जिस
Poised India और Incredible India की तस्वीर हम पेश कर रहे हैं वह ,वह आधुनिकता
नहीं है जो वाह्य दिखावों पर टीका है…वह्…तो शौम्य भारत का…गंभीर सर्वसमावेशीत
आत्माभिमान है। और निश्चित हीं हम इसे अलग पहचान,अलग आलिंगन दे सकते हैं…॥

"हमें कुछ नाज़ है... इस माटी पर कुछ गर्व छुपा है इसमें
मेरा दिव्य- भारत महान... कुछ कर्ज चुकाना है तुझ-पे...
बदल डाली है तेरी आवरु... को एक ऐसे महफील में
झुकी हैं टूट कर पलकें... कहीं उन्हीं के दामन पर
हमें तो याद ही नहीं... हमारी यही वह माता है
यही उसका आँचल है यही उसकी लाज...पड़े हैं फूल
उसके...शहीदों की शाहादत पर...खिलेंगे फूल चौखट
पर मुझे मालूम है एक दिन...कहीं तो अंत होगा ही...
हमारी वासनाओं का...है सलाम उसे जो मेरा है हमारा है
शायद अपनों से भी थोड़ा ज्यादा ही प्यारा है...। "

हमारा देश…हमारा हक, हमारा विश्वास, हमारी पहचान है…

22 comments:

manya said...

well divya ... very nice ... aur ekdum khara sach .. sone jaisa...main jab bhi INCREDIBLE INDIA ye shabad sunti ya dekhti hun to lagta hai ye 100 crore ki aabadi ka nahin par chand mutthi bhar logon ka sach hai india.. asli india jo bharat hai use to hum bhul hi chuke hain.. paschimi sabhyata aur modernisation ki andhi dord me khud ko bhul chuke hain hum.. mujhe to lagta hai hum loktantrik bharat nahin balki capitalistic india ke citizen hain.. metropolitan cities me badhte multiplexes theaters aur shopping mallls ko hum high living standard ki pehchaan maan chuke hain aur manate hain ki hum tarrakki kar rahe hain... ye baat alag hai ki aaj bhi population ka ek bad hissa Garibi Rekha ke neeche hai.... aur media ki to baat hi mat karo hamare liye hero-heroien ki shaadiyan headlincha ka vishay hai aur tv serials me kya ho raha hai ye badi khabar hai... kya yahi gandhi nehru ya subhas chadra bose kw sapno ka bharat hai.. kya isike liye chandra shekhar azad bhagat singh ne jaan di thi.. kya yahi unnati hai.. kya humne apne desh ki kashti ko sambhala hai.. kya hum bhi sirf charcha nahin kar rahe hain.. politicians ki tarah sirf baaten .. ye sahi nahi hai .. kya hum kuchh nahi kar sakte apni matribhoomi ke liye.. "sau me ninyanbe beimaan.. phir bhi mera bharat mahan" ye kahana bahut aasan hai par beimaan hai kaun (not for u but in general) kyun anhi apne andar jhaankar dekhte hain hum.... " ek beej boye hum nav-nirmaan ka, door kar saare andhere , deep jalaye vikaas ka, aur phir se naara lagayen dil se Mera Bharat mahaan ka.."

Udan Tashtari said...

बहुत गहरी बात है और बहुत खुबी से रखी है आपने...साधुवाद.

अनूप शुक्ला said...

उत्तम विचार हैं आपके!

Tarun said...

विचार तो उत्तम हैं लेकिन बैकग्रांउड में बजने वाला म्यूजिक क्या पढने वाले की पसंद पर छोडा जा सकता है,

Divine India said...

Hi Manya,
बहुत-2 धन्यवाद जो इतना मेहनत किया,मेरा मानना है की जो हम पा रहे हैं उसे तो पाना हीं है मगर जो हमारी विरासत की देन थे उसे क्यों खोते जा रहे हैं>>>

समीर भाई,
नहीं चलेगा थोड़ा टिकना होगा आपको,जरा हमें भी तो मौका दे कुछ कहने का बस आए और उड़न तश्तरी की तरह उड़ लिए…आने के लिए धन्यवाद।

Hi Anup,
आपने बड़ी सुंदर बातें कहीं…पधारने के लिए धन्यवाद।

Hello Tarun,
बहुत सही… टिप्पणी में भी निठ्ल्ला पन मजा आता है तुम्हारी बातों को पढ्कर,मैंने सोंचा की भाई को जरा भारतीय संगीत का भी आनंद प्रदान किया जाए,भाषा तो मिल ही रही है…।

antarman said...

Mere Swargiya pitajee ki ek bhavpoorna kavita ka link :
http://www.mpsharma.com/?p=20
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An Interview :
http://www.srijangatha.com/september/kathopkathan.lavanya.htm
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http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/LavanyaShah/LavanyaShah.htm
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http://www.aparnaonline.com/lavanyashah.html
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http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/2002/vasantotsav/vasant.htm
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http://www.abhivyakti-hindi.org/phulwari/natak/ekpal01.htm
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Diyabhji,

ye dekhiyega -- jab bhee samay mile --

Shayad ye ek,
a-vishwashneeya see baat lage sub ko, fir bhee ,itna jaroor kahoongi ki, Videsh mei jo bhee Bharatiya mool ka shikshit varg basa hua hai, wo Bharat ke prati , aaj bhee samarpit hai.

Mere anubhav USA se jude hain -- to ye jaan payee hoon ki, 200 saal+ Aazad hue poore kiye hain aur kafi aantarik viplavon se ye desh gujra hai.

Bharat ko 60 varsh hee hue hain.
Pragti avashya hogee -- main Ashavaan hoon Bharat ke ujjwal bhavishya ke pratii ...dridha astha rakhtee hoon.

Divine India said...

हाँ मैडम मैं जरुर इनको पढ़ना चाहुँगा,आप दोबारा मेरे पृष्टिका पर आईं…मैं कह नहीं सकता मैं कैसा महसूस कर रहा हूँ…सही कहा है आपने मैडम लेकिन जो सच यहाँ के वातावरण में फैला है वो भी नजदीक होने के कारण ज्यादा कोलाहल करता है>>

ranju said...

इसको पढ़ के बहुत से विचार दिल में आए ...बहुत ही सही और अच्छी भाषा में लिखा है आपने ..आपकी एक और सुंदर रचना पढ़ने को मिली हमे ....शुक्रिया

महावीर said...

रोचकता बनाए रखते हुए अत्यन्त ही ज्ञानवर्धक और प्रेरणात्मक लेख है। मातृ-भाषा की ऐसी दशा हो गई है (बल्कि हिंदी भाषी लोगों ने ऐसी दशा कर दी है) कि विदेशी लोग इस के लिए आंसू बहाने लगेः
भारत में बी.बी.सी. संवाददाता पद्म भूषण सम्मानित सर मार्क टली एक वरिष्ट पत्रकार हैं। उन्हें उर्दू और हिन्दी का अच्छा ज्ञान है। भारतीयों का हिन्दी भाषा के प्रति उदासीनता का व्यवहार देख कर उन्होंने कहा था, "… जो बात मुझे अखरती है वह है भारतीय भाषाओं के ऊपर अंग्रेज़ी का विराजमान ! क्योंकि मुझे यकीन है कि बिना भारतीय भाषाओं के ‘भारतीय संस्कृति’ जिंदा नहीं रह सकती। दिल्ली में जहां रहता हूं, उसके आसपास अंग्रेजी पुस्तकों की तो दर्जनों दुकानें हैं, हिन्दी की एक भी नहीं । हकीकत तो यह है कि दिल्ली में मुश्किल से ही हिन्दी पुस्तकों की कोई दुकान मिलेगी ।"
लज्जा आती है कि एक विदेशी के मुख से ऐसी बात सुनकर भी ख्याति के शिखर की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए सफलकारों के कान में जूं भी नहीं रेंगती

Shrish said...

दिव्याभ भाई, आज गूगल पर Incredible India की हिन्दी साइट खोजने हेतु सर्च कर रहा था: "Incredible India Hindi" तो उन्नीसवें नंबर पर आपका ब्लॉग दिखा।

बधाई !

aditi nandan said...

we r certainly in the mood of escaping the realities which has bounded us from all sides.but giving thought the medium in such a impactful manner is definitely a matter of gr8 nerves n gravity.
delicately mix of important points..

RAJEEV said...

MERA BHARAT MAHAAN - 100 KE 100 BE-IMAAN, DON'T CLOSE YOUR EYES SEE THE TRUTH. VISIT http://verson5.tripod.com/

and see naked INDIA by yourself - see the misrule of 60 years - duddha ho gaya India - now is the time to die and re-birth.

RAJEEV said...

MERA BHARAT MAHAAN - 100 KE 100 BE-IMAAN. VISIT http://verson5.tripod.com/

AND SEE FOR YOURSELF THE NAKED TRUTH OF INDIA @ 60. BUDDHA HO GAYA SAALA - NOW TIME FOR REBIRTH.

RAJEEV said...

IF SOMEONE HAS ANY OBJECTION TO MY COMMENTS OR WANTS ANY CLARIFICATION CALL ME ON +1-201-681-8044 - ALL 24 HOURS.

100 KE 100 BE-IMAAN, PHIR BHI BHARAT MAHAAN. KISSE - KAHANION KA DESH- SEE THE HISTORY AND YOU WILL KNOW THAT THE RULERS OF BHARAT WERE AND ARE TERRORISTS.

RAJEEV said...

abb to she ke neeche se bhi "STYAMEV JAYATE HATA DIYA", because that is not relevent now.

RAJEEV said...

since nobody replied to my posting, so it is an accepted fact that India is nothing but 100% be-imaani with each other - criminal bureaucracy, politicians, and all dalaals (pimps). if you have any suggestion / objection write to me on versoninc@verizon.net or call me on +1-201-681-8044.
RAJEEV VERMA - Indian Smuggler.

Divine India said...

Hello Rajiv,
Nahi rajiv bahut hain yahaan baithe jo jabaab bhi de sakte hain...mere pass time nahi tha iss karan blog par nahi aa paa raha tha... sahi kahete hai yahaan sab Be-iman hain lekin kya ye Dil se pucha hai ki hum-aap us shreni mein hain yaa nahi... hamne kiti Ganga ko Saaf kiya apne haatho se jaayeda toh hum jaise hi padhne-likhne bale logo ke pass time nahi hota ...jo prashn puchna jante hain par uttar nahi hota unke pass... koi janm se hi beiman nahi hota use janm diya jata hai... Kya aaj US issase bacha hai... hum kabhi apne aap se ye puccha hai ki humne Bharat ke liye kya kiya...maatr man main Kuntha hone se yaa Shikayat karne se kuch bhi nahi badalne bala... aakar except karo yaar aur jut jao Ek nahi kranti ka Bigul phukne ke liye...

aap yahaan par aaye ye bahut aachha laga...aapke Vichar Kranti kari hain ise Smugglar mat banaiye...Vicharo ko Smuggal karenge toh hum hi lose mein raheenge...
Dhanyebaad.

RAJEEV said...

Atleast someone tried to convince me that we should try to correct the malise lying India, and not to just speak about it. But those who try to be too aggressive were turned out from India, and are still being done away with the same way as Britishers did it. earlier it was Gora Saab, now its Brown Saab. But if you ask yourself, Gora saab was much better than Brown saab, because they both behave the same way, but Gora saab was not part of us, but these brown saabs are from within us, and hence un-acceptable.
Bloody revolution is the only answer.

Rana said...
This comment has been removed by the author.
Rana said...

Hum sabhi ko hamari "Bharat Mata" par garva hona chahiye.Yeh hamari pavitra matrabhumi hei jiske swadhinta aur gurav ke liye sadiyon se samay-samay par un mahaveer yoddhhayon ne janm lekar iske swabhimaan aur gaurav ki raksha hi nahi ki apitu usey pehley se bhi char guna tejhmay bana diya.

Aaj punah hum us mukam par khadey hein jahan se hume shayed humari matrubhumi ki rundhi-rundhi si chikhein humko sunayi de rehi. Aur yehi shayaed ho raha hei kyonki jho mujhe sunayi de raha tha wohi aap sabhi logon ko bhi sunayi diya hei.

Aaj desh khaki,khadi, safed aur kale kot walon ki gandagi se ata pada hei. chand pagalaye logo nei puri matrabhumi ko rond rakha hei. Chand guskhoron ne rupiyon ke khatir desh ke puri sensor pranali ko khatma karkey globalisation ke nara dete huyey ek bar punah hame paschimi amanaviya sabhayata ka gumlam bana diya hein.

Aaj se 25 varsh pahley ka Bharat bahut hei khusnuma Rashtra hua karta tha jahan par veyaktik mulyon ki bajay sabhayata,sanskritik,samaj avem deshbhakti ke mulyon ko ek Bhartiya ke Mastishk aur Man mein pratham sthaan milta tha.

Aaj punah is Bharat Mata ko hum jaisey aur aap jaisey Veeron aur Veeranganaon ki punah jarurat mehsus ho rahi hei. Ya shyad aisa bhi ho sakta hei ki usne hume uske anchaal mein shayad isi uddeshya ke liye janm diya ho.

Aaj humare rashtra ke sabse bade shatru netaon ki woh fhoj hei jinhey apney liya jina to matra 60 varsh hei parantu rajgaddhi ya phir padvi milte hei wohi logh apne shudra vicharon se apney hit kei liya ek hi janm mein 7 pidhi ke khane-pine aur aish ka jugad karna ki mansha ko maan mein liye is Desh,Matrabhumi ya Bharat Rashtra ki Seva ke liye aaghe aakar apne KARMA karte hei aur DHRAMA"Duties" nibhatey hei. Chahey iski liya unhe apni matrabhumi ki boli lagakar hei karna pade. Dusra woh police wale hein jo is mehkame mein matra naukri pane ke liya lakhon rupyey ki rishwat dekar farz aur iman ki kasam khate huye is "Matrabhumi" ki raksha ke liye apna pad dharan kartein hei. Kya to woh pad aur kya uski garima jo apni jameen ya makaan ghirvi rakhkar lakhon roupyon ka bandobast karke matra rupye ki tankhwah par ashrit ho jaye ya phir un logon ki fhoj joh is mehkame ko apna family business samaj kar iske sea mein judtey hei. Usi prakar Judge, IAS, IPS, Manmani Jaghon par tabadla chahne wale, promotion, jalday vibhagh wale, bijli vibhag vale aur un samast sarkari ya phir ardh sarkari upkram vale woh samast log jinhone Swatantra Bharat mein apni saans li aur ek nayi Bhrastachari Pidhi ki nayi sbhyata ka vikas kar dala. JIS PRAKAR KABHI ROME HUA KARTA THA. inhi 50 salon ki ajadi mein matra pehley ke 25 varsh tak Bharat Rastra inke Bankurey Saputon ke havale tha parantu jeisey-jeisey woh bankurey is dharati se vedai lete rahe, vaise-vaise unki jagah in lomdi aur siyar prakrati ke logo ne le li. jiski vajah se aaj apna Rashtra aaj usi hi mukam par khada hei jahan par khabhi "Angrejon Ke Jamaney Mein Hua Karta Tha".

Savaal Paschim ya Purab ka nahi hein, savaal sarva pratham apney Rashtra ki Garima, yaha kei vedic sabhyata, arya aur dravid sanskriti, char varno ke kartavya avem unka dharm "duties" ityadi mulbhut mantron ka aaj ki is now-jawan pidi ko samajhne aur samjhaney bhar ka hei aur "DEKHNA HUM IS RASTRA AUR ISKE GAURAV KO PUNAH SE TAKSHASHILA AUR NALANDA YA PHIR RAMYUGH TAK LE JAYENGE, ISI VIGYAN KO DHWAST KARTE HUEY, MACHINO KEI MAYAVI CHUNGAL SE AJAD HOTE HUEY, ADHYATMA KI RAH PAR, EK NAV-SHRUSTI KE NIRMAN KE LIYE. TOH AUO HUM SAB MILKAR IS NAV-YUGH KA SHNKHANAD KAREIN, AUR MATRA BHARAT MATA KO HI NAHI VARAN IS SAMPURNA DHARTI MATA KO US NAV-YOUG KI AUR LE JANE PRATIGYA KAREIN".

VANDE MATRAM "YEH SAMPURNA DHARTI HI HUMARI MATA aur YAHAN PAR NIWAS KARNEY WALA MANAV PRANI MATRA USI KE DWARA BANAYI GHAI MACHINI SANSKRITI SE DUSKHI HO RAHA HEI"

AUUUMMMMMMMMMMM................

Anshul Gupta said...

it was very nice and i liked the incredible India

India Group Tours said...

Really u provided more heart touchable Incredible India Information After read your Comment We have a proud that we are Indians.