Sunday 20 March 2011

Happy Holi


Raangon Ki Baarish Yaa Hamare Khwaishon Ki Baarish...
Udte Hue Raangin Sapno Mein Aaj Phir Hai Armaano Ki Baarish...
Kisi Ki Umid Mein Thode Rang Bharne Ki Baarish...
Ya Man Ke Kaale Bhanvar Ka Nirmal Rangoon Se Bhigone Ki Baarish...
Bas Itna Hi Kahta Hun, Ye Hai Hamaare Sabhi Ke Ek Prayaash Haamare Pyar Ki Baarish.


"HAPPY HOLI"

Saturday 26 February 2011

Broken Eyes 1












गहरे आकाश पर चलकर फिसल गया हूँ कई बार,
उदास नम आँखों से टपक गया हूँ कई बार,
तन्हाइयाँ बेचैन कर जाती हैं या बेचैनी में तन्हा रह जाता हूँ कई बार…
बहुत सोंचा… बहुत चाहा…
कोई दर्पण उठाकर देखूं खुद को, थोड़ा अपने से समझूं खुद को…
मगर ज्योंही उठाया, दर्पण चनक गया…
अफसोस मेरा थोड़ा हिस्सा और भूला रह गया…
और भूला रह गया…।

Sunday 2 January 2011

नया साल मुबारक!!!!

कुछ छूट रहा है मुझसे गहराते दरियाओं का शहर,
आज आ गया है मुझसे मिलने और नया आरंभन,
बस दो पल के लिए बिखर जाऊँ उस घने आगोश में,
रोज नया आरोहन हो ऐसे सघन आगोश में॥
नये साल की मेरी तरफ से ढेरों शुभकामनाएँ।
HAPPY NEW YEAR TO ALL MY FRIENDS

Friday 5 November 2010

दीपावली की शुभकामनाएं !!!

Divyabh Aryan Photography

मेरे सभी पुराने व नये मित्रों को "दीपावली" की ढेरों शुभकामनाएं


धन्यवाद।

Friday 29 May 2009

मेरा गीत, मेरी मधुशाला…!!!



"काफी समय बीत गया रुह चुराने में…
शायद जीवन और लगे उसे पास लाने में"।


इस दौरान मेरे एक मित्र मधुमये जी जो संगीतकार हैं,
उन्होंने मुझे प्रेरित किया गीत लिखने के लिए और बस
कलमबद्ध गीत की संगीतमय रुपरेखा तैयार हो गई…
वैसे तो ये बहुत पहले ही संगीतबद्ध हो चुका था किंतु
समयाभाव के कारण पोस्ट नहीं कर पा रहा था…
लीजिए प्रस्तुत है मेरा लिखा और मधुमये जी का संगीत
आप सबके सामने…
कैसा लगा ये जरुर बताएँ… वैसे भी पहला प्रयास था मेरा गीत
लिखने का…।

धन्यवाद!!

Friday 14 November 2008

प्रीत की लगन या मुक्ति मार्ग


आगोश में निशा के करवटें बदलता रहता है सवेरा
लिपटकर उसकी संचेतना में बिखेरता है वह प्रांजल प्रभा…
संभोग समाधि का है यह या अवसर गहण घृणा का
फिर-भी तरल रुप व्यक्त श्रृंगार, उद्भव है यह अमृत का…

उत्साह मदिले प्रेम का…
जागते सवेरे में समाधि…
अवशेष मुखरित व्यंग…
या व्यंग इस रचना का…

शायद मेरे अंतर्तम चेतना का गहरा अंधकार
जो अव्यक्त सागर की गर्जना का उत्थान है…
सालों से इतिहास बना वो कटा-फटा चेहरा
कहना चाहता है कुछ मन की बात…

दिवालों की पोरों में थी उसके सुगंधी की तलाश
प्रकृति के संयोग में आप ही योग बन जाने की पुकार…
विस्तृत संभव यथा में लगातार संघर्ष कर पाने का यत्न
किसके लिए… उस एक संभव रुप लावण्य की प्रतीक्षा…

सारा दिवस बस भावनाओं की सिलवटों में बदल ले गई
आराम की एक शांत संभावना…
शायद इस कायनात में रंजित नगमों की वर्षा में सिसकियों
की अभिलाषा ही टिक सकी हैं…

आज इस निष्कर्ष पर जाकर ठहर गया है मन
ना अब किसी की प्रतीक्षा ना किसी की अराधना
खोल दृष्टि पार देख गगन के वहाँ कोई नहीं है
किसी के पीछे…
वहाँ उन्मुक्त सिर्फ मैं हूँ…"मैं"

खोकर एक संभावना आगई देखो कितनी संभावना…
मधुर प्रीत का सत्य संकरे मार्ग से होकर मुक्ति में समा गया…
नजरे उठकर जाते देख तो रही हैं उस उर्जा को पर
अब चाहता नहीं की वो वापस उतर आये मेरे अंतर्तम में…।

=> आप सभी को मेरी ओर से बीते दिपावली की ढेरों बधाइयॉ

क्या करूँ अपनी फिल्म को लेकर बहुत व्यस्त था… बस खुशी इस बात की

है कि मुझे दो फिल्में और मिल गई हैं, जिसका निर्देशन और लेखन मैं ही

कर रहा हूँ…। मेरी पहली Commercial Film, "AUR- Life Is A Story"

है जिसमें संभवत: Kon-Kona-Sen Sharma को लिया जाए… अभी बात

चल रही है… इसकी Shooting लंदन में मार्च में शुरु होगी जिसकी बजह से

व्यस्तता बढ़ गई है … बस आप सब दुआ करें की मैं अपने लक्ष्य को पूरा कर

लूँ… चूंकि इसका निर्देशन मेरा है तो मुझपर काफी बोझ भी है…।कुछ मन में

भावनाएँ उठी सो पता नहीं क्या लिख दिया है…।


Thursday 17 July 2008

आशा का नभ है विशाल…।

जाने कितनी ही सुबह बीत गई रात
को तकने के बहाने पर याद रहा
मेरा यही साथी जो साथ चला था
तन्हाइयों में उस वक्त…
अपने फिल्म को लेकर इतना व्यस्त
हो गया हूँ कि कब रात आती है
और चली जाती है पता ही नहीं चलता।
वैसे मेरी फिल्म का Promo
सीरिफोर्ट ऑडिटोरियम में 20 मई को
दिखलाया गया था जिसमें दिल्ली की
मुख्यमंत्री ने भी शिरकत ली थी…
कुछ तकनीकी पक्ष का काम बचा है
सो उसी को पूरा करने में लगा हूँ।
आज बहुत दिनों बाद आप सब से
कुछ कहने का दिल हुआ तो आशा
(Hope) को साथ ले आया…।



स्वयं के अंतस में अपने को गहरे उतार कर देखो,
वहाँ अंजन की काली रेखा में भी आंनद घटित होता
ही होगा…

जाग हो जाये अगर जाग से ज्यादा,
वहाँ स्वप्नों के आंगन में भविष्य सार्थक होता
ही होगा…

स्वतंत्र हो कर निर्भीक नये आवरण में झांक कर देखो
वहाँ पार सीमाओं के परम विराट जागरित होता
ही होगा…

बाहर निकल कर सघन अंधकार से आसमान में देखो,
वहाँ आशा के नभ-मंडल में उल्लास योग का संगम होता
ही होगा…

"मात्र सुख की आशा में कहाँ जीवन का हर्ष बहता है,
वह तो सत्य प्रवाह है… जो अनंत गहरे में भीतर ही भीतर
इठलाता है…।"

Thursday 10 April 2008

मैं हूँ यही मेरा है नव-निर्माण…



नियती नहीं मेरा किसी सोये हुए इतिहास का
उद्घोषणा प्रकृति का नवीन वर्तमान हूँ…

मन की उदास वृत्ति बेचैन शोक का नाद नहीं
राह दृष्टांत धवल ज्योति का पूँज हूँ

गहन अंधकार निस्तेज आवरण अविद्या शरणार्थी नहीं
प्रस्फुटित काया प्रज्ञा भूषित क्रांति का पुत्र हूँ

हारा हुआ संग्राम कोई मृतकों की परिपाटी नहीं
शिखर मुकुट उद्देश्य जीत का जागा हुआ कटाक्ष हूँ…

पंचरत्नों की माया मात्र जीव सकल निर्माण नहीं
निर्गुण शांत प्रार्थना का परम आनंद हूँ…

मात्र मृदा की संतान उसकी तामसी चेतना नहीं
थोड़ा उपर बहुत उपर अनंत का विस्तार हूँ…

क्रंदन कोलाहल सृष्टि का केवल पंख नहीं
सात्विक प्रेम परमात्मा का अद्भुत श्रृंगार हूँ

विपद तपस्चर्या शून्य योग खंडित जिज्ञासा स्वयं नहीं
जीवन में बहता राग-उल्लास…महान संन्यासी हूँ मैं…।